सुनकर भी अन्सुना कर दिया
हासिल कर फिर अदा कर दिया ..
हररोज न जाने मैंने ,
किन जजबाड़ों पर पर्दा कर दिया !
उठा कर फिर रिहा
मिला कर फिर जुदा कर दिया
हर पल न जाने मैंने
किन उम्मीदों को अलविदा कर दिया ..
खोल कर फिर कैद कर दिया
छेड़ कर फिर खामोश कर दिया ..
हर सिलसिले में न जाने मैंने
किन रास्तों पर सरफ़रोश कर दिया..
महज एक पल में मैंने,
इतना कुछ शामिल कर लिया
समझ ही न पाई की
क्या खो दिया और क्या हासिल कर लिया!!
वाह वाह...अहसास को लफ्जों में बांधा और
ReplyDeleteमन को आज़ाद कर दिया..
सबके एहसासो को कागज पे उतार दिया |👏
ReplyDeleteवाह 👏👏
ReplyDeleteGreat poem💕💕
ReplyDeleteFrom Rekha Agashe. Ye poem likhkar bahut hasil kiya. Hindi poem chan kartes tu 👌👍
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