Tuesday, 7 March 2023

सुनकर भी अन्सुना कर दिया ..

सुनकर भी अन्सुना कर दिया 

हासिल कर फिर अदा कर दिया ..

हररोज न जाने मैंने ,

किन जजबाड़ों पर पर्दा कर दिया !


उठा कर फिर रिहा 

मिला कर फिर जुदा कर दिया

हर पल न जाने मैंने 

किन उम्मीदों को अलविदा कर दिया ..


खोल कर फिर कैद कर दिया 

छेड़ कर फिर खामोश कर दिया ..

हर सिलसिले में न जाने मैंने 

किन रास्तों पर सरफ़रोश कर दिया..


महज एक पल में मैंने,

इतना कुछ शामिल कर लिया 

समझ ही न पाई की 

क्या खो दिया और क्या हासिल कर लिया!!

5 comments:

  1. वाह वाह...अहसास को लफ्जों में बांधा और
    मन को आज़ाद कर दिया..

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  2. सबके एहसासो को कागज पे उतार दिया |👏

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  3. वाह 👏👏

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  4. Great poem💕💕

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  5. From Rekha Agashe. Ye poem likhkar bahut hasil kiya. Hindi poem chan kartes tu 👌👍

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